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यादों में रह गई चि_ी - Aaj Ki Chitthi : पढ़ें हिंदी न्यूज़, Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी

यादों में रह गई चि_ी

अगर साठ के दशक की चर्चित फिल्म आए दिन बहार के अब आई होती तो इसका बेहद लोकप्रिय गीत ..खत लिख दे संवारिया के नाम बाबू सम्भवत: न होता। होता तो तब जबकि खत लिए जा रहे होते। मोबाइल फोन, फिक्स फोन और इंटरनेटके इस दौर में व्यक्ितगत पत्र लिखने का चलन खत्म होता जा रहा है। अब घर से दूर पढऩे या नौकरी के लिए जाने वाले बेटा-बेटी अपने घर में पत्र नहीं लिखते। उनके माता पिता या घर के अन्य सदस्य भी उसे घर से बाहर किस तरह से रहा जाए, इसकी सलाह पत्र लिखकर नहीं दे रहे। अगर डाक-तार विभाग के सूत्रों पर यकीन करें तो कुल भेजे जाने वाले पत्रों में व्यक्ितगत पत्रों का हिस्सा पांच फीसदी से भी कम हो गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डाकतार विभाग के पास काम ही नहीं रहा। अब व्यक्ितगत पत्रों का स्थान ले लिया है क्रेडिट कार्ड के स्टेटमेंट, मोबाइल, बिजली, पानी आदि के बिलों ने। डाक विभाग ने पिछले साल करीब साढ़े छह करोड़ गैर-रािस्टड्र पत्र देश के चप्पे-चप्पे में पहुंचाए। अगर बात रजिस्टर्ड पत्रों की हो तो यह आंकड़ा 21 करोड़ जाता है। इसी प्रकार से करीब 10 करोड़ मनी आर्डरों को उनके गंतव्य स्थानों तक पहुंचाया।

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