CHAMBAL NEWS : पिता आदेश पर मां का बध करने के बाद अशांत मन की शांति को भगवान परशुराम ने चंबल के इस क्षेत्र में किया तप - Aaj Ki Chitthi : पढ़ें हिंदी न्यूज़, Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी
  • November 24, 2020

CHAMBAL NEWS : पिता आदेश पर मां का बध करने के बाद अशांत मन की शांति को भगवान परशुराम ने चंबल के इस क्षेत्र में किया तप

श्योपुर,
क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान परशुराम का मन जब पिता के आदेश पर मां के बध बाद अशांत हुआ तो उन्हें कहां जाकर शांति मिली।

ऐसा कौन सा स्थान है जहां जाकर भगवान परशुराम ने अपने फरसे को त्याग दिया और अशांत मन को शांत करने के लिए वर्षों बरस तप किया।

 

यदि नहीं तो जान लें कि वह स्थान मप्र के चंबल संभाग में है। मप्र के चंबल संभाग के श्योपुर के रामेश्वर त्रिवेणी संगम तट पर भगवान परशुराम ने अपने फरसे को फेंकने के बाद तप किया।

यही वजह है कि रामेश्वर त्रिवेणी संगम में चंबल के एक किनारे पर आज भी घाट का नाम परशुराम घाट बना हुआ है।

हांलाकि परशुराम की यह तपोभूमि गुमनामी में हैं, लेकिन तपोभूमि से इस स्थान का आज भी पौराणिक व धार्मिक महत्व रहा है। जिसके कारण ब्राह्मण समाज के लोगों की यहां बड़ी आस्था है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार मातृहत्या के संताप से व्याकुल हुए परशुराम के मन को रामेश्वर धाम में त्रिवेणी संगम के तट पर अनेक वर्षों की घोर तपस्या के फलस्वरूप चिरशांति मिली थी। चंबल नदी के किनारे प्राचीन परशुराम घाट बना हुआ है। इस स्थान पर भगवान परशुराम के पदचिह्न अंकित है।

यहीं बैठकर परशुराम ने अपने आराध्य शिव के पंचमुखी शिवलिंग का ध्यान किया था। इस क्षेत्र में अनेक प्राचीन देव प्रतिमाएं स्थापित है। अक्षय तृतीया को जनसामान्य में अबूझ सावे के रूप में जाना जाता है। परंतु वास्तव में इसका आशय है कि जिस तिथि का क्षय न हो वह अक्षय तृतीया है।

इसी दिन को भगवान परशुराम के जन्मोत्सव अर्थात जयंती के रूप में मनाते है। यही कारण है कि रामेश्वर धाम से सटे श्योपुर मानपुर क्षेत्र तथा राजस्थान के सवाई माधोपुर में अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाते है। इस दिन काफी संख्या में लोग परशुराम की पूजा अर्चना करने रामेश्वर तीर्थ पहुंचते है।

त्रिवेणी संगम किनारे बना है परशुराम घाट
जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर चंबल, बनास और सीप नदियों के पवित्र संगम पर रामेश्वर धाम व परशुराम घाट स्थित है। इस क्षेत्र के आसपास के इलाके को तपोवन के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र के वन और निर्जन स्थलों पर आज भी पवित्र धूने बने हुए है। जो साधना और तपस्या के बीते युगों की याद दिलाते है।

प्राकृतिक सौंदर्य और रमणीयता के चलते यह तीर्थ सदियों से ऋषि-मुनियों के आकर्षण का केंद्र रहा। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के छठवें अवतारमें भगवान परशुराम की गणना होती है। कहा जाता है कि फरसा धारण करने से पहले वे केवल राम कहलाते थे। इसीलिए यह स्थान रामेश्वर धाम हुआ।

aajkichitthi

Read Previous

MP- व्यापारी की बहू ढेला लगाने वाले युवक के प्यार मे हूई पागल,पेटीकोट मे लगायी जेब नोट रखकर देने किया शुरू

Read Next

हरियाणा से मुरैना आकर खुद को इस अंचल का कर्जदार मान रहे भड़ाना, कहा – यहां का कर्ज चुकाने आया हूं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com