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सिंधिया का नाम आगे आते ही सभी विरोधी हुये एक , आखिर कब तक चलेगी सिंधिया विरोध की राजनीति मध्यप्रदेश मे।

Gwalior hold, Guna decides, Jyotiraditya Scindia will fight only

मोहन शर्मा

भोपाल – कांग्रेस के पीसीसी चीफ को लेकर चल रही खीच-तान के बीच सिंधिया का नाम ताज पोशी के लिए सबसे आगे आ रहा है लेकिन     हर – बार की तरह सिंधिया का नाम आगे आते ही सभी विरोधी हुये एक , आखिर क्यू परहेज सिंधिया से कांग्रेस के दिगज्ज नेताओ को । आखिर कब तक चलेगी सिंधिया विरोध की राजनीति मध्यप्रदेश मे।

राज्य में उनके विरोधी नेता एक बार फिर साथ-साथ खड़े नजर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री के नाम के चयन के वक्त भी सिंधिया विरोधी नेताओं की एकजुटता  के कारण ही कमलनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बन पाए थे. मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया  कहते हैं कि नामों का पैनल नेताओं से चर्चा  करके बनाया गया है. इसमें सिंधिया के नाम का भी सुझाव मिला है

मध्य प्रदेश कांग्रेस में सिंधिया विरोधी राजनीति चार दशक बाद भी बंद नहीं हुई है. माधवराव सिंधिया  कांग्रेस में शामिल होने के बाद से ही उनके विरोधी राजसी छवि को निशाना बनाकर उन्हें राज्य की राजनीति में आने से रोकते रहे हैं. 80 के दशक में सिंधिया के विरोध का नेतृत्व अर्जुन सिंह  करते थे. अर्जुन सिंह के कारण ही दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे. दिल्ली की राजनीति में अर्जुन सिंह की मदद कमलनाथ किया करते थे.

संजय गांधी के कारण ही शिवभानु सिंह सोलंकी वर्ष 1980 में मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे. वे शुक्ल बंधुओं (श्यामाचरण शुक्ल-विद्याचरण शुक्ल) के करीबी थे. उस समय माधवराव सिंधिया कांग्रेस में नए-नए आए थे. इस कारण वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं थे. राजीव गांधी  के प्रधानमंत्री  बनने के बाद माधवराव सिंधिया राज्य में ताकतवर नेता के तौर पर उभर कर सामने आए

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