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राग मिया मल्हार के साथ गाये बारिश के खयाल - Aaj Ki Chitthi : पढ़ें हिंदी न्यूज़, Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी

राग मिया मल्हार के साथ गाये बारिश के खयाल

भारत भवन में गायन-11 का आयोजन

भोपाल,

शास्त्रीय संगीत में विश्व के मानचित्र पर अपने आप को स्थापित करने वाले भुवनेश कोमकली का गायन सुन राजधानी के लोग गदगद हो गए। उस्ताद बिस्मिला खां पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके कोमकली द्वारा यहां भारत भवन में मिया मल्हार राग गाते हुए एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी, आऊं तोरे मंदरवा…पैंया परन देओ मोहे मन वसिया आऊं तोरे मंदरवा..। जैसे गीतों की प्रस्तुति को सुनकर भोपालवासी मंत्रमुग्ध हो गए। सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ यह शास्त्रीय संगीत धीरे-धीरे अपने परवान पर चढ़ता गया। इस बीच बारिश के ख्याल गीतों पर उनकी प्रस्तुति देख लोग दंग रह गये। गायन के साथ-साथ उनके शरीर की भाव-भंगिमा भी अद्भुत थी। जिसके बाद लोग यह कहने को विवश हो गए कि यही संगीत का यथार्थ स्वरूप है।

इन्होंने दिया साथ

भुवनेश कोमकली संग तबले पर इंदौर के पवन सेम द्वारा संगत दी गई। जिनके वादन पर लोग वाह-वाह कह उठे। इन्होंने कभी घोड़ों की टाप तो कभी करतल धुन सुनाकर लोगों की खूब वाहवाही भी लूटी। वहीं हारमोनियम पर संगत दे रहे रोहित मराठे के उंगलियों के जादू को भी लोगों ने खूब सराहा। तानपुरे पर चिरायु और अतुल द्वारा साथ दिया गया।

पानी के लिए गाए खयाली गीत और बंदिशें

मध्यप्रदेश के चर्चित गायक रहे कुमार गंधर्व के पौत्र कोमकली ने इस अवसर पर पारंपरिक खयाली गीत गाए। इसके साथ ही बारिश को लेकर बंदिशें भ्ाी गाईं। उन्होंने बारिश के गीत और मिया मल्हान गायन को लेकर हरिभूमि से की बातचीत में कहा कि अभी बारिश का मौसम है और बारिश की दरकार भी हैञ। यहीवजह है कि इसी से जुड़े राग और गीत यहां पर गाए गए।

युवा कलाकार बनाए रखें धैर्य रखें

उन्होंने यहां आने को लेकर कहा कि भारत भवन में दादाजी के समय बचपन से आता रहा हुं। मुझे यहां आकर गौरव तो महसूस होता ही है, मैं यहां के प्रति आकर्षित भ्ाी रहा हूं। कला प्रेमियों को धैर्य के साथ अपनी कला पर ध्यान देना चाहिए, य मान लें किआगे उन्हेंलाभ होगा।

मप्र सरकार मौका देगी तो सिखऊंगा

83 वर्षीय पंडित अजय पोहनकर ने कहा कि मेरी भी इच्छा है कि मैं मप्र के नए गायनों को गायन की विद्या की शिक्ष्ाा दूं। यदि मप्र सरकार मौका देगी तो मैं यहां आकर जरूर सिखाऊंगा। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में कई शो किए हैं, मगर भोपाल और मप्र में आकर जो सुख मिलता है, वैसा कहीं और नहीं मिलता। क्योंकि यहां आकर घर की अनुभूति होती है।

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