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  • November 24, 2020

कूनों के जंगल में मौजूद ‘नटनी खोह’ के पीछे की “कहानी” है अजब, कभी यहां था भव्य नगर, जो नटनी का सूत कटने से उजड़ा

The "story" behind the 'Natni Khoh' in the forest of Koons is Ajab, once here was a magnificent city, which was destroyed by cutting the thread of the nut

श्योपुर व्युरों,

नटनी को लेकर वैसे तो देश प्रदेश में कई कहानियां विद्यमान हैं और नरवर किले की कहानी इसमें से एक प्रमुख है। मगर श्योपुर के कूनों पालपुर के जंगल में भी एक नटनी खोह नाम का स्थान मौजूद है, जहां पर आज भी प्राचीन नगर के अवशेष हैं और जानकार बताते हैं कि यहां प्राचीनकाल में एक सौम्य नगर हुआ करता था। जहां पर मौजूद दो पहाड़ों को यहां की एक नटनी कच्चे सूत पर चलकर पार कर जाया करती थी। जो इसी करतब को दिखाते हुए तब मर गई, जबकि कच्चे सूत को नाई के उस्तरे से काट दिया गया।

बताया गया है कि इसके बाद इस नगर को लोढी माता का श्राप लगा और वह उजाड़ हो गया। यहां पर लोढी माता का मंदिर भी बना हुआ है। जहां पर लोग दर्शनों के लिए भी जाते हैं।

श्योपुर के इतिहास के विषय में जानकारी रखने वाले कैलाश पाराशर बताते हैं कि यहां पर जो नगर है वेहद प्राचीन है और कच्छपघात राजाओं का बसाया हुआ जान पड़ता है। जो दसवीं सदी के आसपास रहा होगा।

बताया जाता है कि तभी का यह किस्सा है, जिसमें एक नटनी खोह को एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ पर जाने के लिए कच्चे सूत का इस्तेमाल करती थी। ऐसा करने के दौरान एक दफा उसकी शर्त राजा से लगी और वह सूत पर चलकर पहाड़ी पार ही कर रही थी, तभी तलवारों से न कट पाया वह सूत नाई के उस्तरे से कट गया और नटनी गिरकर मर गई। मगर उसके बाद लगे श्राप के वशीभूत वह नगर उजड़ गया और इसके बाद इस स्थान को लोग नटनी खोह के नाम से जानने लगे।

कूनों ने पर्यटन स्थल के तौर पर किया विकसित

कूनों पार्क प्रबंधन इस स्थान को पर्यटकों के लिहाज से विकसित कर रहा है। जिससे कूनों में आने वाले पर्यटकों को यहां पर एक रोमांचक कहानी जानने के साथ ही दो पहाड़ों के मनोरम दृश्य को देखने का मौका मिल सके और पर्यटक अधिक से अधिक देर तक वहां पर रुक सकें। यह स्थान इतिहास प्रेमियों के आने वाले प्रमुख केन्द्रों में से एक है, जहां पर प्रकृति और इतिहास प्रेमी लोग ज्यादातर आते रहते हैं।

भक्तो ने बना दिया मंदिर

कूनों के जंगल में मौजूद नटनी खोह नाम के इस स्थान पर भक्तों ने बाद लोढी माता का मंदिर बना दिया। जहां जाने पर उनमें आस्था रखने वाले लोग मातारानी के दर्शन भी करते हैं, साथ ही उन पहाड़ों को भी देख पाते हैं।

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