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  • September 28, 2020

श्योपुर न्यूज: अपने-अपने पट्ठों को पार्षद पद का उम्मीदवार बनाने दिग्गज नेताओं के बीच देखने को मिलेगा विधानसभा टिकिट जैसा शय-मात का खेल

BJP set up trapping Jandel 50 million trap again, charges of duplication

नगर पालिका श्योपुर के सभी २३ वार्डों के लिए आरक्षण हो चुका है। इसके साथ नगर पालिका चुनाव के लिए विसात भी बिछने लगी है, जिसपर लंबे समय से पार्षद बनने का ख्वाब लिए नेताओं की ढ्योडी पर रोज पहुंचने वाले नेता अब जोर आजमाइश में शुरू हो गए हैं और अपने अपने आका नेताओं के जरिए वार्डों से टिकिट चाहने की जुगत में हैं। यह संघर्ष कांग्रेस की तुलना में भाजपा में अधिक है, क्योंकि भाजपा श्योपुर में कई कद्दावर नेता हैं, जो पार्षद की कुर्सी पर अपने नजदीकियों को पहुंचाना चाहते हैं, यहीवजह है कि यहां पर इन वरिष्ठ नेताओं के बीच अपने अपने प_ों को टिकिट दिलाने को लेकर जोरदार शय मात का खेल देखने को मिलेगा। यह खेल रोमांचक होगा ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए ब्रजराज सिंह चौहान से, जिनके पास स्वयं के पास अपनी टीम है और जो खुद से जुड़े नेताओं को टिकिट दिलाने का भरसक प्रयास करेंगे। इसतरह से भाजपा में पार्षद पद पर अपने प_ों को टिकिट दिलाने को लेकर जिनके बीच खींचतान होगी, उनमें भाजपा के कद्दावर नेता महावीर ङ्क्षसह सिसौदिया, पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र जाट, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष  अशोक गर्ग, रामलखन नापाखेड़ली, विहारी सिंह सोलंकी जैसे नेता शामिल हैं, जाहिर है कि इनमें से कई नेता भविष्य में विधानसभा का चुनाव लडऩा चाहते हैं, जिनके बीच विधानसभा के टिकिट के पूर्व अपने प_ों को पार्षदी का टिकिट दिलाने का महा मुकाबला होगा, जिसपर राजनीति के जानकारों की बारीक नजर रहेगी, वहीं नागरिक भी यह देखने का प्रयास करेंगे कि इस खेल में कौन कितना भारी पड़ता है।

भाजपा में एक नई भूमिका में दिखेंगे बीआर

इस चुनाव में कद्दावर नेता ब्रजराज सिंह चौहान पर लोगो खास नजरें रहेंगी। जो कुछ समय पूर्व ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैंं। अब तक कांग्रेस के नगर पालिका चुनाव में वन मेन आर्मी बनकर टिकिट बांटते चले आए ब्रजराज सिंह चौहान इस दफा बदली हुई भूमिका में हैं और इन कद्दावरों के साथ संघर्ष करते हुए उनके सामने अपने नजदीकियों को टिकिट दिलाने की कड़ी चुनौती रहेगी। क्योंकि भाजपा में वर्षों से मौजूद नेतागण अपने नजदीकियों और पार्टी के कर्मठ सिपाहियों को मौका देने की वकालत करेंगे, जबकि चौहान पर दवाब होगा अपने साथ आए लोगों को टिकिट दिलाने का। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि ब्रजराज सिंह चौहान से कुछ वार्डों में टिकिट देने पर सहमति ली जाए, या उनसे नाम मांगे जाएं और कुछ टिकिट उन्हें भी दिए जाएं, मगर यह सबकुछ बहुत नया नया होगा। उनके लिए भी और उनके साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं के लिए भी, इस चुनाव का सबसे ज्यादा जो आकर्षण होगा, वह यही होगा। संभव है कि बदले हुए परिदृश्य में जन नेता के तौर पर पहचान रखने वाले चौहान को सिंधिया के साथ ही केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का समर्थन भी मिल जाए, यदि ऐसा हुआ तो उन्हें भाजपा में भी पार्षदी से लेकर विधानसभा तक का मौका मिल सकता है।

 

 

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